Thursday, January 23, 2020

Dosti shayri

हो कर मशरूफ  कश्मकश ए हयात मे
बेखबर बेसबब किस उलझन मे फंसा हूँ


मिल गए कुछ यार कूचा ए रोजगार मे
आज एक मुद्दत बाद मैं खुल के हंसा हूँ

Tuesday, January 21, 2020

Izhaar shayri, propose shayri

करता रहा इकतरफा मोहब्बत अरसों से
अब लगा चुपचाप करने मे मजा क्या है

र दिया है बयां हाल ए दिल सरेआम
इकरार है या इनकार, तेरी रज़ा क्या है


इकरार- acceptance, स्वीकार
रज़ा- मर्जी

Sunday, January 19, 2020

Raat shayri

रात, चांद ,तारे और तन्हाई
अधूरे ख़्वाब, अधूरी रुबाई

लाज़िम है तसव्वुर में आये
मेरी मोहब्बत , मेरी जुदाई  

Saturday, January 18, 2020

Shayri

चर्चा तेरे हुस्न का है महज, कूचे मे
वाक़िफ़ तेरी फितरत से मगर सब है

सौ बार की है मोहब्बत तुमने करने को
इक बार भी है याद निभाई कब है?

Friday, January 17, 2020

Mulaqaat shayri

एक नज़र देख के रहा ना दिल पे काबू
आईने सा चेहरे पे कमाल क्या खूब था

खत्म हुई तलाश मुलाक़ात पे आ कर
निगाहें उठाई और सामने महबूब था  

Thursday, January 16, 2020

Love shayri

मुमकिन नही हिज्र तेरा भूल पाना
तू और तेरी चाहत दोनो एक सी है


चाहूँ तो कर लूँ तौबा तेरे दर से मगर                              तेरी लत और ये मोहब्बत दोनो एक सी है


हिज़्र - separation, जुदाई

Wednesday, January 15, 2020

Shayri


जानिब-   direction, side, ओर, तरफ
रहबर - guide, मार्गदर्शक
जुस्तजू -   quest, खोज, तलाश

Tuesday, January 14, 2020

Tareef shayri

मीर की ग़ज़ल हो या शायर का ख़ाब हो तुम ?
शबनम की बूँद हो या नूर ऐ आफताब हो तुम ?
.
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सज संवर के यूँ निकली हो गिराई है बिजलियाँ
नींदों को उड़ाने वाली हसीना लाजवाब हो तुम

Monday, January 13, 2020

chand shayri


बारिश

कभी बूंद बूंद को तरसाया कभी दरख़्त दीवारों को तोड़ा
ना मैं खुद झुका ना रुख हवाओं का मैंने मोड़ा
.
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अंदाज इसका भी है कुछ कुछ मेरे महबूब सा
बिन मौसम की इस बरसात ने मुझे कहीं का ना छोड़ा

Sunday, January 12, 2020

शाम शायरी

शाम ही से शुरू होता है यादों का सिलसिला
शब होते होते पुर जोर रवानी पे आता है

हसरतें बढ़ती है दीदार ऐ यार की फिर
सहर होने से दिल को सुकून आता है

हश्र शायरी


Saturday, January 11, 2020

Seher shayri


मुमकिन नही हर ख़्वाब मुकम्मल होना
अधूरे ख्वाबों का जिक्र इबादत में होता है
.
होता नही ग़र हासिल कुछ इबादतों से
टूटे ख़्वाबों का जिक्र ज़ियारत में होता है



Mukammal- complete
Ibadat-pray
Jiyarat-  religious journey

Friday, January 10, 2020



लिखकर मिटा देता हूँ तुझको अपने जेहन से    
बेहतर खयाल की तलाश दिन रात करता हूँ

कोई यूँ ना समझे कि मोहब्बत हुई है किसी से
मैं शायर हूँ और शायरी की बात करता हूँ 
वो कहता है चाँद में भी दाग़ है सुनील
मग़रूर इतना है अकड़ में मदहोश है


ग़ुरूर चाँद का है मुनासिब अगर मेरी मानो
तुम दाग़ ही देखते हो तुम्हारा दोष है   
थम गया वक्त,थम गया बातों का सिलसिला
ना मंजिल है ना मजलिस ए यार कोई बाकि है

निकल पड़ा हूँ रात की खामोशियों में अकेले
ना साथ रहबर है ना मददग़ार कोई बाकि है
चन्द तस्वीरों में है बाकि उल्फत के निशां
किताबों में सूखा कोई गुलाब मेरे पास नहीं

सबब खुद ही बना अपनी तबाही का मैं
इल्जाम तुझ पे कोई आये मुझे रास नहीं

         
गुजरती बेनयाज़ी मुझे नागवार उसकी
उसे पसन्द नहीं मेरा हद से गुजर जाना

आया नही इश्क़ हदों में करना मुझको
उसे आता था करके किनारा गुजर जाना 
होती नही रात खलिश में बसर
नश्तर सी चुभन है, सुआ कोई लगे

मत पूछ इश्क़ लाइलाज कितना
बेअसर दवा  ना दुआ कोई लगे
भूल जाओ बेशक मुझे ए सनम
तर्क ऐ ताल्लुक़ ये बड़ी बात नही

नज़ारे और भी है बहुत दुनिया में
सितारे गर्दिश में हैं खफ़ा रात नहीं

नाहक है उम्मीद किसी से करना
बर्बाद यूँ ना अपने जज्बात कर

बना ले अपनी अलग दुनिया सुनील
वक़्त खुद से मिले तो किसी से बात कर 
मुझ पर है नवाज़िशें मेरे रब की बेशुमार
दे के वो दर्द पूछता है क्या गिला है

सब जानकर भी बेखबर है मेरे हश्र से
क्या यही मेरी बंदगी का सिला है
मालूम था फ़ितरत है उनकी बेवक्त चले जाना
सब जानकर भी ,क्यूँ मैं खुद ही पे जफ़ा करता

हासिल था उल्फत में फ़क़त ग़म ही सुनिल
किसी कातिल से जो मैं उम्मीद ऐ वफ़ा करता
नहीं था उल्फत का इरादा ना सही
ये तो महज चाहत की बात थी


जरा सी बात पर सर पे उठा ली दुनिया तुमने
कुछ और होता तो क्या बात थी 
वो इक शाम जो गुजरी थी रफाकत में कभी
फिर ना आएगी लौट कर इतना तो तय है

झील में खेलती कश्ती और मांझी का जुनूँ
संभल गया तो पानी है जो बहका तो मय है 
जलता है चाँद भी जुगनू से भला
रोशन जुगनू से कहाँ रात होती है

सवाल रोशनी का रहा अपनी जगह
फर्क पड़ता है वजूद की जहाँ बात होती है 

आदत इबादत की मेरी जाती नहीँ
हद से ज्यादा दिल्लगी मुझे भाती नही

जुस्तजूँ बस इक तेरी है और एक तू है
जो जाती है तो लौट के आती नही
लिखकर मिटा देता हूँ तुझको अपने जेहन से    
बेहतर खयाल की तलाश दिन रात करता हूँ

कोई यूँ ना समझे कि मोहब्बत हुई है किसी से
मैं शायर हूँ और शायरी की बात करता हूँ 

Dosti shayri

हो कर मशरूफ  कश्मकश ए हयात मे बेखबर बेसबब किस उलझन मे फंसा हूँ मिल गए कुछ यार कूचा ए रोजगार मे आज एक मुद्दत बाद मैं खुल के हंसा हूँ ...