Tareef shayri

मीर की ग़ज़ल हो या शायर का ख़ाब हो तुम ?
शबनम की बूँद हो या नूर ऐ आफताब हो तुम ?
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सज संवर के यूँ निकली हो गिराई है बिजलियाँ
नींदों को उड़ाने वाली हसीना लाजवाब हो तुम

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