जिक्र शायरी, zikr shayari, ibaadat shayari, इबादत शायरी

मुमकिन नही हर ख़्वाब मुकम्मल होना
अधूरे ख्वाबों का जिक्र इबादत में होता है
.
होता नही ग़र हासिल कुछ इबादतों से
टूटे ख़्वाबों का जिक्र ज़ियारत में होता है



Mukammal- complete
Ibadat-pray
Jiyarat-  religious journey

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