Tanhaai shayari, तन्हाई शायरी

थम गया वक्त,थम गया बातों का सिलसिला
ना मंजिल है ना मजलिस ए यार कोई बाकि है

निकल पड़ा हूँ रात की खामोशियों में अकेले
ना साथ रहबर है ना मददग़ार कोई बाकि है

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