शाम शायरी

शाम ही से शुरू होता है यादों का सिलसिला
शब होते होते पुर जोर रवानी पे आता है

हसरतें बढ़ती है दीदार ऐ यार की फिर
सहर होने से दिल को सुकून आता है

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