Sunday, January 12, 2020

शाम शायरी

शाम ही से शुरू होता है यादों का सिलसिला
शब होते होते पुर जोर रवानी पे आता है

हसरतें बढ़ती है दीदार ऐ यार की फिर
सहर होने से दिल को सुकून आता है

2 comments:

Dosti shayri

हो कर मशरूफ  कश्मकश ए हयात मे बेखबर बेसबब किस उलझन मे फंसा हूँ मिल गए कुछ यार कूचा ए रोजगार मे आज एक मुद्दत बाद मैं खुल के हंसा हूँ ...