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तारीफ शायरी, tareef shayari | uff ye labon ki laali|उफ़ ये लबों की लाली

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Uff ye labon ki laali
Tauba ye tabassum ka qeher
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Julfon me chhipa shab ka dariya
Aankho me hai noor e seher

तस्वीर हो मुखातिब तो बात बन जाये| तस्वीर शायरी, tasveer shayari|mulaqaat shayari

खाली है दिल खयालों मे तेरी आहट
तुम रूबरू हो तो मुलाक़ात बन जाये


मैं लफ़्ज़ों में ढूंढता हूँ तारीफ का जरिया
तस्वीर हो मुखातिब तो बात बन जाये

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Khali hai dil khayaalon me teri aahat
Tum rubroo ho to mulaqaat ban jaaye
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Main lafzon me dhundta hun tarif ka jariya
Tasveer ho mukhatib to baat ban jaaye

तेरी मोहब्बत का मैं कर्जदार पहले भी था अब भी हूँ , teri mohabbat ka main karjdaar phle bhi tha ab bhi hun| aashnaai shayari,sad shayari

तेरी मोहब्बत का मैं कर्जदार
पहले भी था अब भी हूँ

किया जो इश्क़ तुझसे करके
उस गुनाह का गुनहगार
पहले भी था अब भी हूँ

मैं अब भी लरज़ जाता हूँ
मुश्किल से सम्भल पाता हूँ

आबाद था तेरी आशनाई से
तेरी बेरुखी से बरबाद
पहले भी था अब भी हूँ

ना लिखा कहीं ख़ता क्या रही
ना बात कुछ पता क्या रही


अधूरी जो रह गई कहानी
उस कहानी का किरदार
पहले भी था अब भी हूँ

तेरी मोहब्बत का मैं तलबगार
पहले भी था अब भी हूँ


आशनाई- दोस्ती, प्रेम

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Teri mohabbat ka main karjdaar
Phle bhi tha ab bhi hun

Kiya jo ishq tujhse karke
Us gunah ka gunahgaar
Phle bhi tha ab bhi hun

Main ab bhi laraz jata hun
Muskil se sambhal pata hun

Aabaad tha teri aashnaai se
Teri berukhi se barbaad
Phle bhi tha ab bhi hun

Na likha kahin khata kya rahi
Na baat kuch pata kya rahi

Adhuri jo rah gai kahani
Us kahani ka kirdaar
Phle bhi tha ab bhi hun

Teri mohabbat ka main talabgaar
Phle bhi tha ab bhi hun




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तुम जो करते हो दिल्लगी है प्यार नहीं है,Ishq shayari, इश्क़ शायरी

कितना किया कब किया किस से किया
ना रखो हिसाब ये इश्क़ है व्यापार नही है


करे जो इश्क़ कोई खुदा मानकर तुम्हे
बशर वो मासूम बहुत,अय्यार नहीं है


करते हो तकल्लुफ़ क्यूँ मोहब्बत है अगर
कहते हो आतिश ए इश्क़ तय्यार नहीं है


मालूम नहीं इश्क़ का फलसफा शायद
तुम जो करते हो दिल्लगी है प्यार नहीं है




बशर - human being
अय्यार - clever
फलसफा -philosophy, ज्ञान
आतिश - fire, आग

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Kitna kiya kab kiya kis se kiya
Na rkho hisaab ye ishq hai vyapaar nhi hai

Kre jo ishq koi khuda maankar tumhe
Bashar wo masoom bahut ayyar nhi hai

Karte ho taqalluf kyun mohabbat hai agar
Kahte ho aatish e ishq tayyar nhin hai

Maloom nhi ishq ka falsafa shayad
Tum jo krte ho dillagi hai pyar nhi hai








वस्ल की रात vasl ki raat

माना कि मुश्किल है सफर नही आसान
आएंगे कई इम्तेहान होगी हिज्र की बात 


मुमकिन है दूरी भी होगी दरमियां कभी
आएगी यक़ीनन मगर वस्ल की रात


वस्ल- मिलन
हिज़्र - जुदाई

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Maana ki muskil hai safar nhi aasan
Aayenge kai imtehan hogi hizr ki baat

Mumkin hai duri bhi hogi darmiyan kabhi
Aayegi yakeenan magar vasl ki raat






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Deshbhakti shayri, patriotism shayri

थम ना पायेगा कारवाँ ए अहल ए वतन कभी वतन पर फिदा दीवाने यहाँ नौजवान कम नहीं

वतन से की है मोहब्बत वतन के हैं आशिक हम                आशिकी में हमारी अब, चली जाए जान ग़म नहीं

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Tham na paayega kaarwan e ahal e vatan kabhi
Vatan par fida dewaane yahan naujawan kam nhin

Vatan se ki hai mohabbat,vatan ke hai aashiq ham
Aashiqi me hamari ab, chali jaaye jaan gham nhin


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तुम क्या जानोगे मेरे दिल मे क्या है| shayari on dil, दिल शायरी

तुम क्या जानोगे मेरे दिल मे क्या है
खाली मकां है या कोई रहता यहाँ है

मेहमां बन के आये मुसाफिर बहुत
रहने को हमेशा,कोई आता कहाँ है

आती कहाँ बहार खिज़ाओं मे कभी
खुद ही बना बाग, खुद ही बागबाँ है

साहिल से महरूम हो जैसे लहरे
आबशार ये सूखा,बिन पानी बहा है

अब ये दिल नही बयाबान है कोई
बामुश्किल् परिंदा कोई, जाता जहाँ है


खिज़ा - पतझड़
बागबाँ- माली
महरूम- वंचित
बयाबां - उजाड़, सुनसान जंगल
आबशार - झरना

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Tum kya jaanoge mere dil me kya hai
Khali makan hai ya koi rahta yahan hai

Mehman ban ke aaye musafir bahut
Rahne hmesha koi aata kahan hai

Aati kahan bahaar kabhi khizaon me kabhi
Khud hi bana baag khud hi baagban hai

Sahil se mahroom ho jaise lahre
Aabshaar ye sukha, bin paani baha hai

Ab ye dil nhin bayabaan hai koi
Bamuskil parinda koi, jata jahan hai





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दिल का नगर खाली नहीं होता | shayari on dil, दिल शायरी

उठा दिया करो तुम भी कभी हाथ अर्ज करने के लिए
कि हर बार तारीफ का जरिया ताली नही होता

चले जाओ उठकर महफ़िल से बेशक मग़र सुन लो
किसी एक के चले जाने से दिल का नगर खाली नहीं होता 

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कभी चाँद था मिशाल ए खूबसूरती मेरी नज़र मे,shayari on chaand, चाँद शायरी

उनकी सोहबत ने है बख्शी ये कैसी खुदाई
तौबा कलम से करने की है नौबत आई


कभी चाँद था मिशाल ए खूबसूरती मेरी नज़र मे
अब दो आँखों पर लिख देता हूं सैकड़ो रुबाई


सोहबत - संग, साथ
रुबाइ - 4 line poetry


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खो गया वो मेरा हमनफस दुनियां की भीड़ में, हमनफ़स शायरी, Hamnafas shayari

खो गया वो मेरा हमनफस दुनियां की भीड़ में
बन के रह गया अधूरी कहानियों का हिस्सा

रो देता है आलम ऐ तन्हाई में अक्सर दिल
याद जब आता है गुजरी हुई जिंदगी का किस्सा 


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Sad shayri

क्या तुमने मुझे समझा है कभी,क्या तुमने मुझे है जाना
क्या तुमने कभी झाँका मुझमे, क्या तुमने मुझे पहचाना


मैं जर्द हुआ जाता ग़म मे, मैं सुर्ख हुआ जाता हमदम
इस हाल मे ना तु छोड़ मुझे, मैं दुनिया से बेगाना


हालात मेरे बदतर ना थे  ,ना तुझसे था याराना
अब देख भी ले कुछ याद तुझे, क्या था मेरा अफसाना


ना कसमें थी ना वादे थे ,ना था कोई साथ निभाना
तुझसे मिलने से पहले था ,मै भी खुशहाल दीवाना



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Love shayri

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