तुम जो करते हो दिल्लगी है प्यार नहीं है,Ishq shayari, इश्क़ शायरी


कितना किया कब किया किस से किया
ना रखो हिसाब ये इश्क़ है व्यापार नही है


करे जो इश्क़ कोई खुदा मानकर तुम्हे
बशर वो मासूम बहुत,अय्यार नहीं है


करते हो तकल्लुफ़ क्यूँ मोहब्बत है अगर
कहते हो आतिश ए इश्क़ तय्यार नहीं है


मालूम नहीं इश्क़ का फलसफा शायद
तुम जो करते हो दिल्लगी है प्यार नहीं है




बशर - human being
अय्यार - clever
फलसफा -philosophy, ज्ञान
आतिश - fire, आग

.............
Kitna kiya kab kiya kis se kiya
Na rkho hisaab ye ishq hai vyapaar nhi hai

Kre jo ishq koi khuda maankar tumhe
Bashar wo masoom bahut ayyar nhi hai

Karte ho taqalluf kyun mohabbat hai agar
Kahte ho aatish e ishq tayyar nhin hai

Maloom nhi ishq ka falsafa shayad
Tum jo krte ho dillagi hai pyar nhi hai








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