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वस्ल की रात

माना कि मुश्किल है सफर नही आसान
आएंगे कई इम्तेहान होगी हिज्र की बात 


मुमकिन है दूरी भी होगी दरमियां कभी
आएगी यक़ीनन मगर वस्ल की रात




वस्ल- मिलन
हिज़्र - जुदाई
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Deshbhakti shayri, patriotism shayri

थम ना पायेगा कारवाँ ए अहल ए वतन कभी वतन पर फिदा दीवाने यहाँ नौजवान कम नहीं

वतन से की है मोहब्बत वतन के हैं आशिक हम                आशिकी में हमारी अब, चली जाए जान ग़म नहीं


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Dil shayri

तुम क्या जानोगे मेरे दिल मे क्या है
खाली मकां है या कोई रहता यहाँ है

मेहमां बन के आये मुसाफिर बहुत
रहने को हमेशा,कोई आता कहाँ है

आती कहाँ बहार खिज़ाओं मे कभी
खुद ही बना बाग, खुद ही बागबाँ है

साहिल से महरूम हो जैसे लहरे
आबशार ये सूखा,बिन पानी बहा है

अब ये दिल नही बयाबान है कोई
बामुश्किल् परिंदा कोई, जाता जहाँ है


खिज़ा - पतझड़
बागबाँ- माली
महरूम- वंचित
बयाबां - उजाड़, सुनसान जंगल
आबशार - झरना

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Dil shayri

उठा दिया करो तुम भी कभी हाथ अर्ज करने के लिए
कि हर बार तारीफ का जरिया ताली नही होता

चले जाओ उठकर महफ़िल से बेशक मग़र सुन लो
किसी एक के चले जाने से दिल का नगर खाली नहीं होता 

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Chand shayri

उनकी सोहबत ने है बख्शी ये कैसी खुदाई
तौबा कलम से करने की है नौबत आई


कभी चाँद था मिशाल ए खूबसूरती मेरी नज़र मे
अब दो आँखों पर लिख देता हूं सैकड़ो रुबाई


सोहबत - संग, साथ
रुबाइ - 4 line poetry


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Judaai shayri

खो गया वो मेरा हमनफस दुनियां की भीड़ में
बन के रह गया अधूरी कहानियों का हिस्सा

रो देता है आलम ऐ तन्हाई में अक्सर दिल
याद जब आता है गुजरी हुई जिंदगी का किस्सा 


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Sad shayri

क्या तुमने मुझे समझा है कभी,क्या तुमने मुझे है जाना
क्या तुमने कभी झाँका मुझमे, क्या तुमने मुझे पहचाना


मैं जर्द हुआ जाता ग़म मे, मैं सुर्ख हुआ जाता हमदम
इस हाल मे ना तु छोड़ मुझे, मैं दुनिया से बेगाना


हालात मेरे बदतर ना थे  ,ना तुझसे था याराना
अब देख भी ले कुछ याद तुझे, क्या था मेरा अफसाना


ना कसमें थी ना वादे थे ,ना था कोई साथ निभाना
तुझसे मिलने से पहले था ,मै भी खुशहाल दीवाना



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