Deshbhakti shayri, patriotism shayri


थम ना पायेगा कारवाँ ए अहल ए वतन कभी
वतन पर फिदा दीवाने यहाँ नौजवान कम नहीं


वतन से की है मोहब्बत वतन के हैं आशिक हम                आशिकी में हमारी अब, चली जाए जान ग़म नहीं



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