Shayari on chaand, चाँद पर शायरी

वो कहता है चाँद में भी दाग़ है सुनील
मग़रूर इतना है अकड़ में मदहोश है


ग़ुरूर चाँद का है मुनासिब अगर मेरी मानो
तुम दाग़ ही देखते हो तुम्हारा दोष है   

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