कभी चाँद था मिशाल ए खूबसूरती मेरी नज़र मे,shayari on chaand, चाँद शायरी

उनकी सोहबत ने है बख्शी ये कैसी खुदाई
तौबा कलम से करने की है नौबत आई


कभी चाँद था मिशाल ए खूबसूरती मेरी नज़र मे
अब दो आँखों पर लिख देता हूं सैकड़ो रुबाई


सोहबत - संग, साथ
रुबाइ - 4 line poetry


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